Also Visit for Trending News & Article  Postbox Live

NewsPostbox Hindi

Jivanu – आपके आंत के बैक्टीरिया

1 Mins read

Jivanu – आपके आंत के बैक्टीरिया

 

Jivanu – क्या कहते हैं आपके आंत के बैक्टीरिया – प्राची पाखरे

 

 

 

 

 

पिछले कईं वर्षोंसे हम यह मानते आयें हैं कि बैक्टीरिया Jivanu (जीवाणु) एक ऐसा जीव है जिससे हमें बचना चाहिए। हमारे शरीर में अरबों की मात्रा में बैक्टीरिया होते हैं

जो हमारी पाचनक्रिया के काम आकार हमें स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। एक अनुसंधान के अनुसार , अगर आपको डायबिटीज, मोटापा, डिप्रेशन या पेट का कैंसर जैसी बीमारियां हैं,

तो आपके आंत के बैक्टीरिया की स्थिति इन्ही बीमारियों से जुडी होती है।

 

आंत के बैक्टीरिया Jivanu क्या हैं ?

आपके आंत के आतंरिक भाग में लगभग २ लाख जीन के ३०० से ५०० विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया होते हैं। यह बैक्टीरिया, अन्य सूक्ष्मजीवों के साथ जुड़े होते हैं जैसे,

व्हायरस (विषाणु) और फंगस। इनसे समरूप होने बाद इन्हे माइक्रोबायोटा या माइक्रोबायोम कहा जाता है।

अंगुलि छाप की तरह हर इंसान का माइक्रोबायोटा अनोखा होता है : आपके शरीर में Jivanu बैक्टीरिया का मिश्रण हर किसी के मिश्रण से अलग होता है।

यह आंशिक रूप से आपकी माँ के माइक्रोबायोटा द्वारा निर्धारित होता है। साथ ही वह वातावरण जिसे आप जन्म के समय उजागर करते हैं और आंशिक रूप

से अपने आहार और जीवन शैली से माइक्रोबायोटा निर्धारित होता है।

बैक्टीरिया आपके पूरे शरीर में रहते हैं, लेकिन आपकी आंत में रहनेवाले बैक्टीरिया आपकी सेहत पर सबसे ज्यादा असर करते हैं । पेट और आंत में रहनेवाले बैक्टीरिया,

पाचनक्रिया पर असर करते हैं। इतनाही नहीं यह बैक्टीरिया, आपकी चयापचय क्षमता, आपकी मनोदशा और आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली पर भी असर करते हैं।

 

आंत के बैक्टीरिया और बीमारियां

अनुसंधान के अनुसार स्वस्थ लोगों के शरीर में रहनेवाले आंत के बैक्टीरिया, बीमार इंसान के शरीर में रहनेवाले बैक्टीरिया से अलग होते हैं। जो लोग अक्सर बीमार रहते हैं,

उनमे विशिष्ट प्रकार के बैक्टीरिया की मात्रा कम या ज्यादा होती है। या उनमें विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया की कमी हो सकती है। माना जाता है कि,

कुछ क़िस्म के बैक्टीरिया बीमारियों से रक्षा करते हैं, तो कुछ बिमारी उत्पन्न करने की जोखिम बढ़ाते हैं।

वैज्ञानिकों ने निम्नलिखित बीमारियों और आंत के बैक्टीरिया के बीच संबंध बनाना शुरू कर दिया है :

मोटापा, टाइप २ डायबिटीज (मधुमेह) और ह्रदयरोग :

आपके पेट के बैक्टीरिया आपके शरीर के चयापचय को प्रभावित करते हैं। आपको भोजन से कितनी कैलोरी (उष्मांक) मिलती है और उस अन्न से किस प्रकार के पोषक

तत्व आपको मिलते हैं, यह सारी चीजें बैक्टीरिया निर्धारित करते हैं। आंत के बैक्टीरिया अगर अधिक मात्रा में बढ़ गये तो आपके शरीर के फाइबर को वे फैटी एसिड में

बदल सकते हैं। इसके कारण आपके लीवर में फैट जमा हो सकता है और यह ”मेटाबॉलिक सिंड्रोम” (चयापचय बीमारी के लक्षण) कहलाता है।

 

Also Visit : https://www.postboxlive.com

 

ऐसी स्थिति में इंसान को टाइप २ डायबिटीज, ह्रदयरोग और मोटापे से संबंधित बीमारियां होती हैं।

सूजन संबंधी आंत्र रोग जैसे क्रोहन रोग और अल्सरेटिव कोलाइटिस (सव्रण बृहदांत्रशोथ) : ऐसी स्थितिवाले लोगों में सूजन विरोधी प्रतिरक्षा करनेवाले

आंत के बैक्टीरिया की कमी होती है। ऐसा भी माना जाता है कि, कुछ बैक्टीरिया, आपकी आंतों पर हमला कर सकते हैं और इन बीमारियों के लिए चरण निर्धारित कर सकते हैं।

कोलोन कैंसर (पेट का कैंसर) :

एक अध्ययन के अनुसार, कोलोन कैंसर होनेवाले लोगों में एक अलग आंत माइक्रोबायोटा होता है, जिसमें स्वस्थ लोगों की तुलना में उच्च स्तर के रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया शामिल होते हैं।

घबराहट, डिप्रेशन और ऑटिज्म :

आंत तंत्रिकाओं (नर्व्स) से भरी होती है, जिसका संबंध मस्तिष्क के साथ होता है और वह मस्तिष्क के साथ संवाद करती है। डॉक्टर्स इस तरह के संपर्क को

“आंत-मस्तिष्क अक्ष” ( गट- ब्रेन एक्सिस) कहते हैं । एक अध्ययनने, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के विकारों और आंत के बैक्टीरिया के संबंधों को उजागर किया है,

जिसके कारण घबराहट, डिप्रेशन और ऑटिज्म जैसी बीमारियों की उत्पत्ति होती है।

 

गठिया (आर्थ्राइटिस) :

ऐसे माना जाता है कि, स्वस्थ लोगों की तुलना में संधिशोथ की बिमारी होनेवाले लोगों में अधिक मात्रा में Jivanu बैक्टीरिया होते हैं, जिनका संबंध सीधे सूजन संबंधी विकारों से होता है ।

 

 

 

 

Postbox India Health

Leave a Reply

error: Content is protected !!
%d bloggers like this: